फर्जी चालान एपीके और खतरनाक एंड्रॉइड ट्रोजन चोरी-छिपे भारतीय बैंक खाते कैसे कर रहे हैं खाली
फर्जी ट्रैफिक चालान और बिजली बिल के एसएमएस में आए एपीके लिंक पर क्लिक करते ही फोन पर कब्जा करने वाले मैलवेयर का तकनीकी विश्लेषण।

भारत में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने वाला सबसे खतरनाक नया हथियार 'मैलिशियस एपीके फाइल्स' (Malicious APKs) बन चुका है। फर्जी ई-चालान और बिजली बिल कटने के एसएमएस के जरिए भेजे जाने वाले ये ट्रोजन फोन में इंस्टॉल होते ही यूजर का पूरा बैंकिंग नियंत्रण हैकर्स के हाथों में सौंप देते हैं।
ट्रोजन कैसे काम करता है?
उपयोगकर्ता को एक एसएमएस मिलता है: "आपका ₹500 का ई-चालान पेंडिंग है। विवरण देखने के लिए ऐप डाउनलोड करें।" जैसे ही यूजर लिंक पर क्लिक करके .apk फाइल इंस्टॉल करता है, यह ऐप फोन से एसएमएस पढ़ने (READ_SMS) और एक्सेसिबिलिटी सर्विसेज की परमिशन मांग लेता है।
इसके बाद यूजर को कुछ भी पता नहीं चलता। जब भी बैंक से कोई ओटीपी आता है, ट्रोजन उसे स्क्रीन पर प्रदर्शित होने से पहले ही हैकर्स के सीक्रेट सर्वर पर फॉरवर्ड कर देता है और यूजर के बैंक खाते से लाखों रुपये साफ हो जाते हैं।
सुरक्षा के जरूरी नियम
- गूगल प्ले स्टोर के अलावा किसी भी अनजान लिंक या व्हाट्सएप मैसेज से कोई .apk फाइल कभी इंस्टॉल न करें।
- अपने फोन की सेटिंग्स में 'Install unknown apps' विकल्प को हमेशा बंद रखें।
- सरकारी चालान का भुगतान केवल आधिकारिक परिवहन वेबसाइट (echallan.parivahan.gov.in) पर ही करें।

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